Thursday, 22 November 2018

जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट करना है तो कार्तिक मास में इन पुष्पों से करें श्री विष्णु की पूजा

साेमवार, 14 अक्‍टूबर 2019 से कार्त‍िक का महीना शुरू हो गया था तथा इस मास की समाप्ति 12 नवंबर, शुक्रवार कार्तिक पूर्णिमा के साथ होगी। इस महीने में खासतौर पर श्री विष्णु पूजन किया जाता है। कार्तिक माह भगवान विष्णु का महीना माना गया है। पूरे कार्तिक मासपर्यंत निम्न फूलों से श्री हरि भगवान विष्णु का पूजन करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के सभी पाप नष्‍ट हो जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इतना ही नहीं विशेष कर देवउठनी एकादशी या हरि प्रबोधिनी एकादशी के दिन तो अवश्य ही इन पुष्पों से नारायण का पूजन करना चाहिए। इन पुष्पों के साथ ही तुलसी दल से पूरे कार्तिक मास में विष्‍णु पूजन करने से मनुष्य को सभी तरह के सुख और चारों दिशाओं से समृद्धि की प्राप्ति होती है।

आइए जानें...


  1. कार्तिक मास में जो मनुष्य बिल्व पत्र से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, वे मुक्ति को प्राप्त होते हैं।
  2. जो मनुष्य वकुल और अशोक के फूलों से भगवान विष्णु का पूजन करते हैं, वे सूर्य-चंद्रमा रहने तक किसी प्रकार का शोक नहीं पाते।
  3. जो मनुष्य अगस्त्य के पुष्प से भगवान विष्‍णु का पूजन करते हैं, उनके आगे इंद्र भी हाथ जोड़ता है। तपस्या करके संतुष्ट होने पर हरि भगवान जो नहीं करते, वह अगस्त्य के पुष्पों से भगवान को अलंकृत करते हैं।
  4. कार्तिक मास में तुलसी दर्शन करने, स्पर्श करने, कथा कहने, नमस्कार करने, स्तुति करने, तुलसी रोपण, जल से सींचने और प्रतिदिन पूजन-सेवा आदि करने से हजार करोड़ युगपर्यंत विष्णुलोक में निवास करते हैं।
  5. जो मनुष्य तुलसी का पौधा लगाते हैं, उनके कुटुम्ब से उत्पन्न होने वाले प्रलयकाल तक विष्णुलोक में निवास करते हैं।
  6. जो मनुष्य कार्तिक मास में तुलसी का रोपण करता है और रोपी गई तुलसी जितनी जड़ों का विस्तार करती है उतने ही हजार युगपर्यंत तुलसी रोपण करने वाले सुकृत का विस्तार होता है।
  7. जिस किसी मनुष्य द्वारा रोपी गई तुलसी से जितनी शाखा, प्रशाखा, बीज और फल पृथ्वी में बढ़ते हैं, उसके उतने ही कुल जो बीत गए हैं और होंगे, वे 2,000 कल्प तक विष्णुलोक में निवास करते हैं।
  8. जो मनुष्य कदम्ब के पुष्पों से श्रीहरि का पूजन करते हैं, वे कभी भ‍ी यमराज को नहीं देखते।
  9. जो भक्त गुलाब के पुष्पों से भगवान विष्णु का पूजन करते हैं, उन्हें मुक्ति मिलती है।
  10. जो मनुष्य सफेद या लाल कनेर के फूलों से भगवान का पूजन करते हैं, उन पर भगवान अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
  11. जो मनुष्य भगवान विष्णु पर आम की मंजरी चढ़ाते हैं, वे करोड़ों गायों के दान का फल पाते हैं।
  12. जो मनुष्य दूब के अंकुरों से भगवान की पूजा करते हैं, वे 100 गुना पूजा का फल ग्रहण करते हैं।
  13. जो मनुष्य विष्णु भगवान को चंपा के फूलों से पूजते हैं, वे फिर संसार में नहीं आते।
  14. पीले रक्त वर्ण के कमल पुष्पों से भगवान का पूजन करने वाले को श्वेत द्वीप में स्थान मिलता है।
  15. जो भक्त विष्णुजी को केतकी के पुष्प चढ़ाते हैं, उनके करोड़ों जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं।
  16. जो मनुष्य शमी के पत्र से भगवान की पूजा करते हैं, उनको महाघोर यमराज के मार्ग का भय नहीं रहता।
  17. कार्तिक मास में जो मनुष्य तुलसी से भगवान का पूजन करते हैं, उनके 10,000 जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

कार्तिक मास में दीप दान करना ना भूलें, शुभ फल के साथ होगी हर कामना पूरी, पढ़ें ये 7 खास नियम

हिन्दू पौराणिक और प्राचीन ग्रंथों में कार्तिक मास का विशेष महत्व है। पुराणों में कहा है कि भगवान नारायण ने ब्रह्मा को, ब्रह्मा ने नारद को और नारद ने महाराज पृथु को कार्तिक मास के सर्वगुण संपन्न माहात्म्य के संदर्भ में बताया है।


धर्म शास्त्रों के अनुसार इस पूरे कार्तिक मास में व्रत व तप का विशेष महत्व बताया गया है। उसके अनुसार, जो मनुष्य कार्तिक मास में व्रत व तप करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। कार्तिक मास में 7 नियम प्रधान माने गए हैं, जिन्हें करने से शुभ फल मिलते हैं और हर मनोकामना पूरी होती है। ये 7 नियम इस प्रकार हैं -

1. नियम :

दीप दान - धर्म शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास में सबसे प्रमुख काम दीप दान करना बताया गया है। इस महीने में नदी, पोखर, तालाब आदि में दीप दान किया जाता है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।

2. नियम :

तुलसी पूजन - इस महीने में तुलसी पूजन करने तथा सेवन करने का विशेष महत्व बताया गया है। वैसे तो हर मास में तुलसी का सेवन व आराधना करना श्रेयस्कर होता है, लेकिन कार्तिक में तुलसी पूजा का महत्व कई गुना माना गया है।

3. नियम :

भूमि पर शयन - भूमि पर सोना कार्तिक मास का तीसरा प्रमुख काम माना गया है। भूमि पर सोने से मन में सात्विकता का भाव आता है तथा अन्य विकार भी समाप्त हो जाते हैं।

4. नियम :

तेल लगाना वर्जित - कार्तिक महीने में केवल एक बार नरक चतुर्दशी (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी) के दिन ही शरीर पर तेल लगाना चाहिए। कार्तिक मास में अन्य दिनों में तेल लगाना वर्जित है।

5. नियम :

दलहन (दालों) खाना निषेध - कार्तिक महीने में द्विदलन अर्थात उड़द, मूंग, मसूर, चना, मटर, राई आदि नहीं खाना चाहिए।

6. नियम :

संयम रखें - कार्तिक मास का व्रत करने वालों को चाहिए कि वह तपस्वियों के समान व्यवहार करें अर्थात कम बोले, किसी की निंदा या विवाद न करें, मन पर संयम रखें आदि।

7. नियम :
ब्रह्मचर्य का पालन - कार्तिक मास में ब्रह्मचर्य का पालन अति आवश्यक बताया गया है। इसका पालन नहीं करने पर पति-पत्नी को दोष लगता है और इसके अशुभ फल भी प्राप्त होते हैं।

Tuesday, 18 October 2016

लक्ष्मी को साधने के लिए करें ये।


आज के युग में आजीविका बहुत ही महत्वपूर्ण है। भारतीय वैदिक दर्शन शास्त्रों में विषम परिस्थितियों में लाभ पाने के लिये टोने-टोटके या धार्मिक अनुष्ठानों का सहारा भी लिया जाता है, इनके माध्यम से ओवर ड्राफ्टिंग के माध्यम से संचित में से कुछ बेहतर प्रारब्ध पाने की चेष्टा करते है।

इसके अनेकों उदाहरण मिलते हैं जैसे कि वर्ष में मुख्य दो बार आने वाले नवरात्रों के पर्व में श्री मार्कण्डेय ऋषि द्वारा रचित श्री दुर्गा सप्तशती में 700 श्लोकों का संग्रह है और उसी में `वृत्ति` को भी देवी मानकर नमस्कार किया गया है।

इस सप्तशती में प्रथम चरित्र अध्याय-1 की देवी महाकाली जी है। 
मध्य चरित्र अध्याय दो से चार तक की देवी महालक्ष्मी जी है और उत्तम चरित्र अध्याय 5 से 13 तक की देवी महा सरस्वती जी है। अर्थात ज्ञान की देवी सरस्वती के अध्याय ज्यादा है सूचित करते है कि बुद्धि के द्वारा लक्ष्मी को प्राप्त किया जा सकता है और संसार की तामसिक प्रवृत्तियों से सुरक्षा की जा सकती है।

तभी अध्याय 5 जहां सरस्वती जी आरम्भ होती है अर्थात पंचम अध्याय के श्लोक संख्या 59 से 61 तक में कहा गया है।
`या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:॥`
अर्थात जो देवी सब प्राणियों में वृत्तिरूप से स्थित है। उनको नमस्कार, उनको वारंबार नमस्कार।
वृत्ति को देवी रूप में मानकर श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया गया है अर्थात वृत्ति जीवन में अति महत्वपूर्ण चीज है।

इसी प्रकार इसी पुस्तक में धन की कामना पूर्ति हेतु एक विशेष सूत्र दिया गया है, वह इस प्रकार से है-
`भौमवास्यानिशमग्ने चन्द्रे शतभिषां गते।
विलिख्य प्रपठते् स्त्रोतं स भवेत् सम्पदां पद्म॥`
अर्थात मंगलवार की अमावस्या की आधी रात में जब चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र पर हों। उस समय इस स्त्रोत को लिखकर जो इसका पाठ करता है वह संपत्तिशाली होता है।

इस श्लोक में मुहूर्त विज्ञान के माध्यम से ज्योतिष की ही गणना है कि जब मंगलवार को ही अमावस्या हो और शतभिषा नक्षत्र में अर्थात राहु के उस नक्षत्र में जहां सौ तारों की बात में कुंभ राशि में हो।

इसी प्रकार सूर्य दीपावली पर्व पर तुला राशि में होता है उस दिन आत्मा और मन के कारक सूर्य, चंद्रमा इकट्ठे होते हैं तो स्थिर लग्न में  श्रीवृद्धि के लिए लक्ष्मी पूजन किया जाता है। 

Friday, 18 December 2015

जैमिनी ज्योतिष

जैमिनी पद्धति के अनुसार व्यवसाय चयन हेतु कारकांश महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। (कारकांश आत्म कारक का नवमांश है) यदि कारकांश या उससे दसवां किसी ग्रह से युक्त न हो तो कारकांश से दशमेश की नवमांश में स्थिति से व्यवसाय ज्ञात किया जाता है।
1) कारकांश में सूर्य राजकीय सेवा देता है और राजनैतिक नेतृत्व देता है।
2) पूर्ण चंद्र व शुक्र कारकांश में लेखक व उपदेशक बनाता है।
3) कारकांश में बुध व्यापारी तथा कलाकार का योग प्रदान करता है।
4) बृहस्पति कारकांश में जातक को धार्मिक विषयों का गूढ़ विद्वान व दार्शनिक बनाता है।
5) कारकांश में शुक्र जातक को सरकारी अधिकारी शासक व लेखक बनाता है।
6) कारकांश में शनि जातक को विख्यात व्यापारी बनाता है।
7) कारकांश यदि राहु हो तो मशीन निर्माण कार्य, ठगी का कार्य करने वाला जातक को बना देता है।
8) कारकांश का केतु से संबंध हो तो जातक नीच कर्म तथा धोखाधड़ी से आजीविका कमाता है।
9) कारकांश यदि गुलिक की राशि हो और चंद्र से दृष्ट हो तो व्यक्ति अपने त्यागपूर्ण व्यवहार से और धार्मिक कार्यों से जीविका अर्जित करेगा।
10) कारकांश में यदि केतु हो और शुक्र से दृष्ट हो तो धार्मिक कार्यों से आजीविका अर्जित करेगा।
11) कारकांश यदि सूर्य व शुक्र द्वारा दृष्ट हो तो जातक राजा का कर्मचारी बनता है।
12) कारकांश से तीसरे और छठे में क्रूर ग्रह हों तो जातक खेती व बागवानी का कार्य करता है।
13) कारकांश में चंद्र हो और शुक्र से दृष्ट हो तो वह रसायन विज्ञान द्वारा आजीविका अर्जित करता है।
14) कारकांश में चंद्र यदि बुध द्वारा दृष्ट हो तो जातक डॉक्टर होता है।
15) कारकांश में शनि हो या उससे चौथे में हो तो जातक अस्त्र-शस्त्र विद्या में निपुण होता है।
16) कारकांश से चौथे में सूर्य या मंगल शस्त्रों से जीविका प्रदान करता है।
17) कारकांश से पांचवें या लग्न में चंद्र व गुरु जातक को लेखनी द्वारा जीविका अर्जन प्रदान करते हैं।
18) कारकांश में पांचवें व सातवें में गुरु हो तो व्यक्ति सरकारी उच्च अधिकारी होता है।
19) कारकांश में यदि शनि हो तो जातक पैतृक व्यवसाय करता है।
20) कारकांश लग्न या उससे पंचम स्थान में अकेला केतु हो तो मनुष्य ज्योतिषी गणितज्ञ, कंप्यूटर विशेषज्ञ होता है।
21) कारकांश लग्न से पंचम में राहु हो तो जातक एक अच्छा मैकेनिक होता है।
22)यदि नवांश में राहु आत्मकारक के साथ हो तो जातक चोरी, डकैती से आजीविका चलाता है।
23) कारकांश लग्न से शनि चतुर्थ या पंचम हो तो जातक निशानेबाज होता है और यही आजीविका का साधन भी हो सकता है।
24) कारकांश से पंचम में शुक्र हो तो जातक को कविता करने का शौक होता है।
25) कारकांश से पंचम में यदि गुरु हो तो जातक वेदों और उपनिषेदों का जानकार और विद्वान होता है तथा यही जातक की आजीविका का साधन भी होता है।
26) कारकांश से पंचम में यदि सूर्य हो तो जातक दार्शनिक तथा संगीतज्ञ होता है।

रामायण का नाम वाल्मीकि जी ने राम चरित मानस क्यों रखा ?

तुलसी दास जी ने जब राम चरित मानस की रचना की, तब उनसे किसी ने पूंछा कि बाबा!आप ने इसका नाम रामायण क्यों नहीं रखा? क्योकि इसका नाम रामायण ही है.बस आगे पीछे नाम लगा देते है,वाल्मीकि रामायण,आध्यात्मिक रामायण.आपने राम चरित मानस ही क्यों नाम रखा?

बाबा ने कहा - क्योकि रामायण और राम चरित मानस में एक बहुत बड़ा अंतर है.रामायण का अर्थ है राम का मंदिर, राम का घर,जब हम मंदिर जाते है तो एक समय पर जाना होता है,मंदिर जाने के लिए नहाना पडता है,जब मंदिर जाते है तो खाली हाथ नहीं जाते कुछ फूल,फल साथ लेकर जाना होता है.मंदिर जाने कि शर्त होती है,मंदिर साफ सुथरा होकर जाया जाता है.

और मानस अर्थात सरोवर, सरोवर में ऐसी कोई शर्त नहीं होती,समय की पाबंधी नहीं होती,जाती का भेद नहीं होता कि केवल हिंदू ही सरोवर में स्नान कर सकता है,कोई भी हो ,कैसा भी हो? और व्यक्ति जब मैला होता है, गन्दा होता है तभी सरोवर में स्नान करने जाता है.माँ की गोद में कभी भी कैसे भी बैठा जा सकता है.

इसलिए जो शुद्ध हो चुके है वे रामायण में चले जाए और जो शुद्ध होना चाहते है वे राम चरित मानस में आ जाए.राम कथा जीवन के दोष मिटाती है
"रामचरित मानस एहिनामा, सुनत श्रवन पाइअ विश्रामा"
राम चरित मानस तुलसीदास जी ने जब किताब पर ये शब्द लिखे तो आड़े (horizontal)में रामचरितमानस ऐसा नहीं लिखा, खड़े में लिखा (vertical)
राम
चरित
मानस

किसी ने गोस्वामी जी से पूंछा आपने खड़े में क्यों लिखा तो गोस्वामी जी कहते है रामचरित मानस राम दर्शन की ,राम मिलन की सीढी है ,जिस प्रकार हम घर में कलर कराते है तो एक लकड़ी की सीढी लगाते है ,जिसे हमारे यहाँ नसेनी कहते है,जिसमे डंडे लगे होते है,गोस्वामी जी कहते है रामचरित मानस भी राम मिलन की सीढी है जिसके प्रथम डंडे पर पैर रखते ही श्रीराम चन्द्र जी के दर्शन होने लगते है,अर्थात यदि कोई बाल काण्ड ही पढ़ ले, तो उसे राम जी का दर्शन हो जायेगा.

Thursday, 8 May 2014

व्यक्ति भी होता हैं मोबाईल की तरह रिचार्ज

जिस प्रकार मोबाइल को निरंतर उपयोग में लेने के लिए उसे चार्ज करना जरुरी होता हैं। ठीक उसी प्रकार व्यक्ति भी अपने कार्यों को निष्पादन निरंतर करता रहें। इसके लिए उसे उर्जा की आवश्यकता होती हैं। वास्तुशास्त्र में ऐसे कई रहस्य वर्णित हैं। उन्हीं रहस्यों में से एक हैं। दक्षिण दिशा मध्य से दक्षिण-पश्चिम दिशा में शयनकक्ष का विधान।

आज जब वास्तु का प्रचलन बढ रहा हैं तो व्यक्तियों को वास्तु के सामान्य नियमों का ज्ञान हो चला हैं। जैसें:- किचन अग्निकोण में होना चाहिए ,शयनकक्ष दक्षिण दिशा में होना चाहिए। यहाँ उनका चह मानना तो सही हैं कि किचन अग्निकोण में या शयनकक्ष दक्षिण दिशा में होना चाहिए परन्तु

1. एक तो इस बात का कि अग्निकोण या दक्षिण दिशा उनके भुखण्ड में है भी या नही यदि हैं तो वह कहाँ हैं इसका पता उन्हें नही होता हैं। वे अपने भूखण्ड में ही समस्त दिशाएं स्थित हैं ऐसा मानते रहें हैं। जबकि वास्तव में ऐसा नही होता हैं। हमारी पृथ्वी का झुकाव 23.5 Degree का हैं। अर्थात व्यक्ति जो दिशाओ को 0 Degree  मानकर आकलन करता हैं।

2. दूसरा इन नियमों के सैधांतिक पक्ष का पता उन्हें नही होता कि अग्निकोण किचन के लिए या शयनकक्ष दक्षिण दिशा में ही क्यों? प्रतावित हैं।


चित्र-A में नवग्रहो कि दिशाएं बताई गई हैं जिसके अनुसार उर्जा कारक ग्रह मंगल दक्षिण दिशा कि स्वामी हैं। मंगल ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में सेनापती कहा गया हैं। सेनापति वह जोकि सम्पूर्ण सेना का नैतृत्व करता हैं। जो सम्पूर्ण सेना का नैतृत्व करे उसमें कितनी उर्जा होगी हम इसमा अंदाजा लगा सकतें हैं साथ ही उसकी बात सेना का प्रत्येक व्यक्ति मानता हैं अर्थात मंगल Commanding Power भी देता हैं। घर का मुखिया भी सेनापति कि तरह ही परिवार में कार्य करता हैं। परिवार कर प्रत्येक सदस्य उसका कहना मानें व समाज में उसका प्रभुत्व बढे इसके लिए उसे मंगल कि उर्जा कि आवश्यक्ता पडती हैं। 


चित्र-B के अनुसार प्रात:काल जब सूर्य पूर्व दिशा से उदय होते हैं तो सूर्य कि Solar Energy ईशानकोण से भूखण्ड में प्रवेश करती हैं जो कि सूर्य के साथ-साथ  नैऋृत्यकोण तक जाती हैं। सूर्य पश्चिम दिशा में अस्त होतें हैं अत: Solar Energy नैऋृत्यकोण तक ही रहती हैं। यह Solar Energy जिसे भूखण्ड ने दिनभर संचित किया था। वह रात भर व्यक्ति को बैटरी कि तरह चार्ज करती हैं यदि यहाँ शयनकक्ष हुआ तो अन्यथा व्यक्ति चार्ज होने से वंचित रह जाएगा।

इस Solar Energy को संचित करने कि लिए ही दक्षिण व पश्चिम दिशा में भारी निमार्ण का विधान वास्तु से संबंधित शास्त्रों में दिया गया हैं। साथ ही यह भी वर्णित हैं कि यदि इन दिशाओं में सूई की नोक के बराबर छिद्र भी हुआ तो घर में Negative Energy प्रवेश कर जाती हैं।

यहाँ ऋषीयों ने व्यक्ति को शयनकक्ष हेतू बाध्य करने के लिए Negative Energy के प्रवेश का उल्लेख किया हैं। हमारे ऋषीमुनि खगोल के ज्ञाता थें। वे जानते थे कि यदि इन दिशाओं में छिद्र हुआ तो सूर्य से प्राप्त Solar Energy संचित नही हो पाएगी वह छिद्र के माध्यम से बाहर चली जाएगी और व्यक्ति चार्ज होने से वंचित रह जाएगा।

सारांश - मंगल ग्रह की उर्जा व सूर्य की Solar Energy जो व्यक्ति ग्रहण करता हैं। दक्षिण दिशा मध्य से दक्षिण-पश्चिम दिशा में शयनकक्ष बनवाकर। वह व्यक्ति निरंतर उन्नति को प्राप्त करता हैं। परिवार के लोगों में तालमेंल, समाज में अपनी प्रतिष्ठा, प्रभूत्व या कार्यक्षेत्र में विकास करने में समर्थ रहता हैं।

Monday, 21 April 2014

कौन बनेगा भारत का प्रधानमंत्री ?

आज देश में जब लोकसभा के चुनाव हो रहें हैं तो लोगो कि नजर यह देखने में लगी हैं कि इस बार कौन होगा भारत का प्रधानमंत्री। अटकले लगाने का बाजार गर्म हैं।
            यदि हम पार्टियो कि बात करें तो प्रत्येक पार्टी अपने अपने नेता के जितने कि बात कर रही हैं। सभी नैताओ कि पास अलग-अलग किन्तु मजबुत मुद्दें हैं। यदि हम आप पार्टी कि बात करे तो ऐसा नेता मिलता हैं जिसने कुर्सी कि परवाह किये बिना लोगो कि बारे में ही सोचा। यहाँ यह भी माना जा रहा हैं कि आप के मुख्य नेता अरविन्द केजरीवाल शायद अपने किये गए वादो को पूरा करने में स्वयं ही असमर्थ थे सो उन्होनें अपने पद से स्तीफा दे दिया। वास्तविक्ता का जबकि पता ही नही हैं किसी को कि क्या सही हैं। किन्तु ये तो माना ही होगा कि उन्होने हो मुद्दे उठाए वह आम आदमी के हित के लिए ही थे।
            ठीक दूसरी तरफ काग्रेंस ने जो विकास पिछलें 10 वर्षों में देश में किये उन्हे भी नजर अंदाज नही किया जा सकता हैं मैट्रों, फ्लाईओवर, एयरपोर्ट, मोबाइल में 2जी, 3जी और अब 4जी सराहनीय कार्य रहें हैं। किन्तु साथ ही कई ऐसे भी कार्य रहें जो अत्यंत दु:खदायी रहैं। खैर overall इनके पास भी दमदार मुद्दा हैं प्रधानमंत्री बनने का।
            अब हम बात करतें हैं बीजेपी की पिछले विधानसभा चुनाव में दमदार जीत हासिल करने वाली पार्टी बीजेपी ने भी सदैव विपक्ष में रहकर अहम भुमिका निभाई हैं। आजादी के बाद बहुत कम ही अवासर इस पार्टी को देश की कमान संभलने का मिला। वर्तमान में बीजेपी के मुख्य नेता नरेन्द्र मोदी जिन्होनें गुजरात का नाम देश में ही नही विदेशो में भी फैलाया हैं। अब वे उसी विकास को सम्पूर्ण भारत में भी करना चाहते हैं। कई आलोचनात्मक कार्य भी गुजरात में इनके शासन काल में रहें हैं। अटकलो के बाजार में नरेन्द्र मोदी को लगभग देश का प्रधानमंत्री मान भी लिया गया हैं। मिडिया भी इस बात को हवा दे रही हैं। सभी विपक्ष की पार्टी को इस बात का एहसास भी शायद हैं।
आइये हम जाने कि ज्योतिष गणना के अनुसान भारत के प्रधानमंत्री बनने कि उम्मीद किस नेता कि ज्यादा हैं।
1. अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी)- केजरीवाल कि पत्रिका वृषभ लग्न कि हैं। चंद्रलग्न भी वृषभ ही हैं।
Arvind Kejriwal Horoscope
वृषभ राशि वाले व्यक्ति सदैव लोगो का भला करते हुए पाए जातें हैं। अपने बुते से बाहर जाकर कार्य करना कई बार उन्हे नुकसान दे जाता हैं। केजरीवाल की पत्रिका में शनि वक्री होकर द्वादश भी में नीच राशि में होकर स्थित हैं। शनि का नीचभंग भी नही हो रहा हैं। 7 नवम्बर से गोचर के वक्री गुरु ने इन्हे दिल्ली विधानसभा में जीत दिलवाई। 28 दिसम्बर 2013 से 14 फरवरी 2014 तक ये दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे। वक्री गुरु मे ही पद का त्याग भी कर दिया। यदि वर्षकुण्डली का अध्ययन करे तो वर्षेश सूर्य हैं और मुथा कुभं की हैं जिसके स्वामी शनि हैं। मुंथा भाव पंचम हैं। मंगल भी नीच के  Natal horoscope में स्थित हैं। पत्रिका का दशम भाव जहाँ रोजगार से संबंधित होता हैं वही सम्मान प्राप्ति व अप्राप्ति को भी दर्शाता हैं। नवम व दशमभाव के स्वामी ग्रह शनि की द्वादश भाव में वक्री होकर स्थित हैं। गोचर में भी चल रहें वक्री शनि अब सम्मान को क्षति पहुचाने लगेगें। जिस प्राकार अरविंद केजरीवाल का नाम चढा था उसी प्रकार अब उतरने भी लगेगा।
            दिसम्बर 2013 में जहॉ आप पार्टी को लोग एक शसक्त पार्टी मानने लगें थे अब वे ही नकारने लगेंगें। मुख्यमंत्री पद के हिसाब से इन दिनो इनकी पत्रिका कमजोर हो चली हैं। सप्तमेंश मंगल जो कि गोचर में 2 मार्च से वक्री चल रहें हैं। वे अपने ही दल के लोगो में अलगाव को बढाऐगें। परिणाम हम इन दिनो देख ही रहें हैं।

2. राहुल गाँधी (कांग्रेस पार्टी)-  राहुल गाँधी की पत्रिका मकर लग्न की हैं तथा इनकी राशि वृश्चिक हैं। वृश्चिक में
Rahul Gandhi Horoscope
स्थित चंद्रमा नीच के होतें हैं। चन्द्रमॉ का नीचभंग भी नही हो रहा हैं साथ ही चतुर्थ भाव में शनि भी अपनी नीच राशि मेंष में होकर स्थित हैं। किन्तु यहाँ शनि का नीचभंग हो रहा हैं। इस समय इनकी पत्रिका में चंद्रका में मंगल की दशा चल रही हैं। दोनो ही ग्रह (चंद्रमा व मंगल) पत्रिका में एक दूसरे से छठे व आठवे होकर स्थित हैं। अत: यह दशा षडाष्टक ग्रहों कि दशा कहलाती हैं। षडाष्टक ग्रह की दशा शुभ परिणाम नही देती हैं साथ ही शनि भी इस समय गोचर में इनकी राशि वृश्चिक से द्वादश भाव में चल रहे हैं हो कि साढेसाती के रुप में पीडित कर रहें हैं। मंगल जो कि एक उर्जात्मक ग्रह हैं वे इनकी पत्रिका में अस्त भी हैं। अस्त ग्रह कि दशा शुभ परिणाम देने में असमर्थ होती हैं। यहॉ हम ऐसे व्यक्ति कि कल्पना कर समते हैं हो देना तो कुछ चाहतें हैं किन्तु स्वयं के जले शरीर के कारण स्वयं ही पीडित हैं। ज्योतिष में एक नियम हैं कि यदि कोई ग्रह जब अस्त् होता हैं तो उस ग्रह के शुभ-अशुभ परिणाम सुर्य देते हैं। क्योकि ग्रह सूर्य के सानिद्धय में ही अस्त होते हैं। यहाँ यदि हम सूर्य से शुभ परिणाम प्राप्ति कि बात करें तो सूर्य भी 3.33 अंश पर स्थित हैं। जो कि लगभग राशिसंधि के पास हैं। अत: सूर्य इनके लिए favorable रुप से कार्य करने में असमर्थ हैं। गुरु भी जून तक मिथुन राशि में ही रहेगें जो कि इनकी चंद्रकुण्डली से अष्टम भाव में स्थित हैं। अत: गुरु भी शुभ फल प्रदान करने में असमर्थ से प्रतित हो रहें हैं।
            अब हम इनकी वर्ष कुण्डली का अध्ययन भी कर लेते हैं। 18 जुन 2013 को निर्मित वर्षकुण्डली मकर लग्न की हैं। इसमें वर्षेश शनि व मुथां सिंह कि हैं जो कि अष्टम भाव में स्थित हैं। अर्थात मुथां भाव अष्टम हैं। वर्षेश शनि कार्यो में सफलता धीरे-धीरे प्रदान करेगें। इस वर्ष शनि के प्रभाव से व्यक्ति किसी पर भी पूर्णरुप से विश्वास नही करे पाऐगें। शनि कि प्रभाव के कारण योजनाए बनाने में व्यवहारिक व दर्शानिक दृष्टिकोण तो अपनाते हैं किन्तु सफलता का स्तर घटता रहता हैं। जिसका आभास व्यक्ति को होने भी लगता हैं।
अष्टम भाव की मुथां इस वर्ष पद, स्वास्थ्य,सम्मान, पारिवारिक रिश्तो व प्रतिष्ठा आदि विषयों से हानि प्रदान कर सकती हैं। इस समय व्यक्ति को अत्यधिक संधर्ष अपने आप को व अपके पक्ष को बनाएं रखने के लिा करने पडते हैं। सफलता प्राप्त न होने पर धार्मिक प्रवृति का त्याग तक करने कि सोचने लगता हैं। ऐसा यदि करता हैं तो आगे चलकर ओर भी नुकसान दायक रहता हैं। अष्टम भाव की मुंथा व वर्षेश शनि होने पर धर्म-कर्म में समय देना हितकर रहता हैं। Overall  प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रुप में यह पत्रिका भी दमदार प्रतीत नही हो रही हैं।

3. नरेन्द्र मोदी (भाजपा पार्टी)-  तुला लग्न की जन्मपत्रिका नरेन्द्र मोदी की हैं। मंगल लग्न में ही विराजमान हैं। बुध
Narendra Modi Horoscope
उच्च के वक्री होकर द्वादश भाव में स्थित हैं। चन्द्र राशि मिथुन हैं। इनकी जन्म पत्रिका में लग्र के स्थित मंगल इन्हे उर्जावान व अविश्वनिय निर्णय लेने वाला बनातें हैं। लग्न में स्थित मंगल व्यक्ति को साहसी, आत्मविश्वासी व उच्चकोटि का कार्य करने मे सक्षम बनाते हैं। मंगल के प्रभाव में व्यक्ति selfdisicion लेने वाला होता हैं जिसके  कई बार खामियाजा भी अठाना पडता हैं।
ज्योतिष जगत में शुक्र व मंगल के combination के प्रभाव वाले व्यक्ति अपने कार्यो को कलात्मक तरीके से स्पष्टता पूर्वक करता हैं। जिसकी छाप लोगो के दिलो पर लम्बे समय तक बनी रहती हैं। नरेन्द्र मोदी कि जन्मपत्रिका में लग्न मे ंमंगल तुला राशि में स्थित हैं जिसपर शनि सूर्य युक्त शुक्र कि दृष्टि द्वारा व नावांश कुण्डली में शुक्र व मंगल एक दूसरे के नावांश में स्थित होकर शुक्र व मंगल के संयुक्त गुणों का प्रभाव इनपर दर्शा रहे हैं। इनकी जन्म पत्रिका में दशम भाव के स्वामी चंद्रमा नवम भाव में स्थित हैं हो कि एक राजयोग हैं साथ ही अस समय लग्नेश शुक्र में दशमेंश चंद्रमा की दशा भी चल रही हैं। गुरु भी इस समय पत्रिका के नवम भाव व चंद्रराशि से गोचर कर रहें हैं। जो कि इनमें आत्मविश्वास व कार्यो में सफलता को दर्शा रहे हैं। इन दिनो जो मोदी कि लहर कहा जा रही हैं वह शुक्र-चंद्र कि दशा व गुरु की देन हैं। 16 जुन 2013 से 14 फरवरी 2015 तक यह दशा रहेगी जो इनके प्रधानमंत्री होने का पुखता प्रमाण दे रही हैं।
            अब हम इनकी वर्ष कुण्डली पर भी एक नजर डाल लेते हैं कि क्या वर्ष कुण्डली भी इनके प्रधानमंत्री होने का प्रमाण दे रही हैं या नही?
अक्टुबर 2001 में जब से गुजरात के 14वें मुख्यमंत्री बने थे तो उस समय इनकी वर्ष कुण्डली में वर्षेश सूर्य व मुंथा मकर राशि कि थी। इस वर्ष भी सितम्बर 2013 में निर्मित इनकी वर्ष कुण्डली में वर्षेश सूर्य व मुंथा मकर की ही हैं। अर्थात वर्ष कुण्डली भी प्रधानमंत्री पद का प्रमाण दे रही हैं।
इतने शुभ योगो के बाद भी एक बात ध्यान देने वाली हैं कि इनकी पत्रिका में राजयोगकारक चंद्रमा केन्द्रुम योग का  निर्माण कर रहे हैं। ज्योतिष में राजयोग भंगध्याय में लिखा है कि यदि चंद्रमा षडबल में कमजोर हो, अस्त , नीचराशि, शत्रुक्षेत्री, केन्द्रुम योग में व कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथी के पश्चात व शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथी के पूर्व का चंद्रमा (पक्षबल हीन) हो तो समस्त राजयोग भंग हो जाते हैं।


तीनो पत्रिकाओ का निष्कर्ष - प्रधानमंत्री पद पर तो नरेंद्र मोदी ही होगें किन्तु पूर्णबहुमत से सरकार बनाने में संदेह हैं।